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लकड़ी कहै लुहार की , तू मति जारे मोहिं। एक दिन ऐसा होयगा , मैं जारौंगी तोहि॥ 237॥

The blacksmith's wood says, 'You deceive me with your mind. A day will come when I will burn you.'

कबीर
अर्थ

लकड़ी कह रही है कि लुहार से, 'तुम अपने मन से मुझे धोखा देते हो। एक दिन ऐसा आएगा जब मैं तुम्हें जला दूँगी।'

विस्तार

यह दोहा बड़ा गहरा और मार्मिक है, जहाँ लकड़ी लुहार से कहती है, 'तुम मुझे मत जलाओ, एक दिन ऐसा आएगा जब मैं तुम्हें जलाऊँगी।' यहाँ लकड़ी का 'जलना' सिर्फ़ भौतिक आग नहीं, बल्कि ये उस अदृश्य शक्ति या कर्म के फल की बात है जो अंततः अहंकार और क्षणभंगुर ताक़त को भस्म कर देती है। यह हमें सिखाता है कि कोई कितना भी शक्तिशाली क्यों न समझे, प्रकृति या कर्म का चक्र सबसे ऊपर होता है।

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