साईं आगे साँच है , साईं साँच सुहाय। चाहे बोले केस रख , चाहे घौंट मुण्डाय॥ 236॥
“The truth lies before Sai, Sai is the truth, O beloved. Whether you speak of the curtain of hair, or the severed head.”
— कबीर
अर्थ
साईं के आगे सत्य ही सत्य है, और साईं ही सत्य हैं, हे प्रिय। चाहे वह बालों के पर्दे की बात करे या कटे हुए सिर की।
विस्तार
यह दोहा हमें समझाता है कि असली सत्य तो साईं में ही है, और साईं को सत्य ही प्रिय है। चाहे हम बालों को रखने की बात करें या उन्हें मुंडवाने की, ये सब तो बाहरी दिखावे या अलग-अलग पथ हैं। कबीर दास जी यहाँ कहना चाहते हैं कि इन बाहरी भेदों से परे, हमें उस परम सत्य को साईं में ही खोजना चाहिए, क्योंकि वही सार है।
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