संह ही मे सत बाँटे , रोटी में ते टूक। कहे कबीर ता दास को , कबहुँ न आवे चूक॥

“The Lord divides the truth, and the bread is shared. Kabir says to his devotee, never will you err.”

— कबीर
अर्थ

अर्थात्, प्रभु ही सत्य का बँटवारा करते हैं, और भोजन भी साझा किया जाता है। शायर कबीर कहते हैं कि हे भक्त, तुम्हें कभी गलती नहीं होगी।

विस्तार

कबीर दास जी यहाँ समझाते हैं कि जिस तरह रोटी के टुकड़े सब में समान रूप से बांटे जाते हैं, उसी प्रकार ईश्वर भी सबको सच्चाई और नेकी बाँटते हैं। यह एक सुंदर रूपक है, जो दिखाता है कि जीवन की भलाई और सत्य का स्रोत ईश्वर ही हैं। वे कहते हैं कि जो भक्त इस दिव्य मार्ग पर चलता है, उसे कभी कोई चूक नहीं होती, क्योंकि स्वयं भगवान ही उसका मार्गदर्शन करते हैं। यह अटूट विश्वास ही व्यक्ति को सही राह पर रखता है और उसे गलतियों से बचाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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