साँझ पड़े दिन बीतबै , चकवी दीन्ही रोय। चल चकवा वा देश को , जहाँ रैन नहिं होय॥

“As evening falls, the day passes away, the cuckoo cries and we weep. Oh cuckoo, go to that land, where the night does not exist.”

— कबीर
अर्थ

जैसे ही शाम ढलती है और दिन बीत जाता है, चकवी रोती है और हम भी रोते हैं। हे चकवा, तुम उस देश चले जाओ जहाँ रात नहीं होती।

विस्तार

कबीर यहाँ शाम के ढलने और चकवी के रोने के दर्द भरे बिम्ब का उपयोग करते हैं, जो समय के बीतने और वियोग के दुख को दर्शाता है। चकवी का अपने साथी से रात में बिछड़ना हमें सांसारिक मोह और माया के अंधेरे में आत्मा के भटकने की याद दिलाता है। यह मार्मिक पुकार दरअसल उस शाश्वत लोक की तलाश है, जहाँ रात का अँधेरा कभी नहीं होता, जहाँ आत्मा परमात्मा से मिलकर निरंतर प्रकाश और आनंद में रहती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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