या दुनियाँ में आ कर , छाँड़ि देय तू ऐंठ। लेना हो सो लेइले , उठी जात है पैंठ॥

“Having come into this world, leave this arrogance. Take what you want, and let the false pride depart.”

— कबीर
अर्थ

इस दुनिया में आकर, तू यह अहंकार छोड़ दे। जो लेना है, ले ले; यह झूठा गर्व अब चला जाता है।

विस्तार

कबीर दास जी यहाँ हमें बड़े प्यार से समझा रहे हैं कि इस दुनिया में आकर हमें अपना अहंकार छोड़ देना चाहिए। वे कहते हैं कि यह संसार एक 'पैंठ' यानी बाजार जैसा है, जो कुछ समय के लिए लगता है और फिर उठ जाता है। इस थोड़ी सी अवधि में हमें जो सच्चा मोल लेना है, जैसे नम्रता और प्रेम, वह ले लेना चाहिए। क्योंकि व्यर्थ का अभिमान तो खुद-ब-खुद चला जाएगा, तो उसे पकड़ कर क्या फायदा!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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