“Maya (illusion) has become a deceitful woman, tricking all countries. Whoever tricks the deceitful woman, I command that person be tricked (by Maya).”
माया तो ठगनी बनी, ठगत फिरे सब देश। जा ठग ने ठगनी ठगो, ता ठग को आदेश। (अर्थात्, माया ने एक धोखेबाज स्त्री का रूप ले लिया है और वह सभी देशों को धोखा दे रही है। जो भी इस धोखेबाज स्त्री को धोखा देने का प्रयास करेगा, उसे भी धोखेबाज़ (माया) द्वारा धोखा दिया जाएगा।)
कबीर दास जी यहाँ माया को एक ऐसी धोखेबाज़ औरत के रूप में देखते हैं जो हर जगह लोगों को अपने जाल में फंसाती फिरती है। उनका कहना है कि यह माया इतनी प्रबल है कि अगर कोई सोचता है कि वह इसे धोखा दे देगा, तो असल में वह खुद ही माया के चंगुल में और ज़्यादा फंस जाएगा। यह हमें सिखाता है कि सांसारिक मोह-माया से चालाकी करना व्यर्थ है, क्योंकि यह हमें और गहरे दलदल में ले जाता है।
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