पत्ता बोला वृक्ष से , सुनो वृक्ष बनराय। अब के बिछुड़े ना मिले , दूर पड़ेंगे जाय॥

“The leaf spoke to the tree, 'Listen, O tree, we shall never meet again; we will wander far apart.'”

— कबीर
अर्थ

पत्ते ने पेड़ से कहा, 'सुनो पेड़, अब हम बिछुड़ेंगे तो दोबारा कभी मिल नहीं पाएंगे, और बहुत दूर चले जाएंगे।'

विस्तार

यह दोहा कबीर दास जी की गहरी सोच को दर्शाता है, जहाँ पत्ता और वृक्ष का संवाद असल में जीवन की क्षणभंगुरता को दिखाता है। जैसे पत्ता पेड़ से बिछड़कर कभी वापस नहीं मिलता, वैसे ही सांसारिक रिश्ते और मोह भी अस्थायी होते हैं। कबीर जी हमें समझाते हैं कि जीवन में बिछड़ना तय है और हमें इस सच्चाई को प्रेम से स्वीकार करना चाहिए कि कोई भी भौतिक बंधन हमेशा के लिए नहीं रहता।

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