पाहन पूजे हरि मिलें , तो मैं पूजौं पहार। याते ये चक्की भली , पीस खाय संसार॥ 212॥
“Worshipping stones, people seek God, so I shall worship a mountain. This grinder is indeed good, for it feeds the world.”
— कबीर
अर्थ
पाहन पूजने से हरि मिलें, तो मैं पहाड़ पूजूँगा। यह चक्की सचमुच अच्छी है, क्योंकि यह संसार को भरण-पोषण करती है।
विस्तार
कबीर जी यहाँ बहुत ही प्यार से समझा रहे हैं कि अगर पत्थर पूजने से भगवान मिलते हैं, तो फिर भला पहाड़ों को क्यों न पूजें, जो उनसे कहीं ज़्यादा विशाल हैं। वे कहते हैं कि इन सब से बढ़कर तो वो चक्की है, जो अनाज पीसकर पूरी दुनिया का पेट भरती है। ये हमें बताता है कि दिखावटी पूजा-पाठ से ज़्यादा महत्व उस काम का है जो असल में लोगों के काम आता है और जीवन को पोषण देता है।
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