पानी केरा बुदबुदा , अस मानस की जात। देखत ही छिप जाएगा , ज्यों सारा परभात॥ 211॥
“Like water that bubbles, such is the nature of man. He vanishes at a mere sight, like the entire dawn.”
— कबीर
अर्थ
पानी केरा बुदबुदा, ऐसी ही है मनुष्य की प्रकृति। यह एक पल में गायब हो जाता है, ठीक वैसे ही जैसे पूरी सुबह का प्रकाश।
विस्तार
कबीरदास जी हमें समझा रहे हैं कि इंसान का जीवन कितना क्षणभंगुर है, ठीक वैसे ही जैसे पानी का बुलबुला या सुबह की रोशनी। जैसे ही हम उसे देखते हैं, वो पल भर में गायब हो जाता है, ठीक वैसे ही जैसे पूरी सुबह देखते ही देखते दिन में बदल जाती है। यह हमें याद दिलाता है कि हमारा अस्तित्व कितना अस्थायी है, इसलिए हमें इस छोटी सी ज़िंदगी का हर पल पूरी जागरूकता और सच्चाई से जीना चाहिए, न कि व्यर्थ की चीज़ों से चिपके रहना चाहिए।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
← Prev11 / 10
