ज्यों नैनन में पूतली , त्यों मालिक घर माहिं। मूर्ख लोग न जानिए , बहर ढ़ूंढ़त जांहि॥

“As the eyes are filled with tears, so is the master in his house. Foolish people do not know, they keep searching for the ocean.”

— कबीर
अर्थ

ज्यों नैनों में पुतली (आँसू) होती है, वैसे ही मालिक (ईश्वर) घर में होते हैं। मूर्ख लोग यह नहीं जानते कि वे सागर (बाहरी) में खोज करते रहते हैं।

विस्तार

कबीर दास जी यहाँ कितनी प्यारी बात कह रहे हैं! वे कहते हैं कि जिस तरह हमारी आँखों में पुतली होती है, उसी तरह ईश्वर भी हमारे अपने भीतर, हमारे इस 'घर' (शरीर) में ही निवास करते हैं। पर नादान लोग इस सच को नहीं जानते और उन्हें बाहर दुनिया में ढूँढ़ते फिरते हैं। यह दोहा हमें याद दिलाता है कि परमात्मा कहीं दूर नहीं, बल्कि हमारे अंदर ही मौजूद हैं।

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