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जा घट प्रेम संचरे , सो घट जान समानजैसे खाल लुहार की , साँस लेतु बिन प्रान191

The heart that does not flow with love, is equal to that heart. Like the skin of a blacksmith, which loses life without breath.

कबीर
अर्थ

जिस हृदय में प्रेम का प्रवाह नहीं होता, वह हृदय किसी अन्य हृदय के समान ही है। वह लोहार की खाल के समान है, जिसमें साँस न होने पर प्राण नहीं होते।

विस्तार

कबीर दास जी इस दोहे में बताते हैं कि प्रेम के बिना हृदय कितना सूना होता है। उनका कहना है कि जिस दिल में प्यार नहीं है, वो बिलकुल लोहार की धौंकनी जैसा है – जो सिर्फ हवा भरता है, साँस लेता दिखता है पर उसमें जीवन नहीं होता। प्रेम ही हमारे अस्तित्व को असली रंग और आत्मा देता है, वरना हम सिर्फ एक खाली खोल की तरह जीते रहते हैं।

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