“O Kabir, deceive us, but do not deceive anyone. Deceiving us brings happiness, and deceiving others brings sorrow.”
कबीरा, आप हमारा छल कीजिए, और किसी और को छल मत करना। आपको छल करने से सुख होता है, और दूसरों को छल करने से दुख होता है।
नमस्ते! कबीर दास जी यहाँ कितनी गहरी बात कह रहे हैं। वो कहते हैं कि अपने आप को 'ठगा' जाना स्वीकार कर लो, पर किसी और को धोखा मत दो। इसका मतलब है कि जब हम अपने अहंकार को छोड़कर किसी गुरु की बातों को या सच्चाई को विनम्रता से स्वीकार करते हैं, तो वो एक तरह से खुद को ठगाना ही है, पर इसमें हमें असली सुख मिलता है। लेकिन अगर हम दूसरों को छलते हैं, तो उसका नतीजा हमेशा दुख और पश्चाताप ही होता है, क्योंकि निस्वार्थता में ही सच्ची खुशी है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
