एक ते जान अनन्त , अन्य एक हो आय। एक से परचे भया , एक बाहे समाय॥

“One is the source of the endless, another is the one who has become a unit. From one, the creation appears, and within one, the other resides.”

— कबीर
अर्थ

एक ही स्रोत से अनंत का ज्ञान होता है, और दूसरा एक इकाई बन जाता है। एक से सृष्टि प्रकट होती है, और दूसरे का निवास भी उसी में होता है।

विस्तार

कबीर इस दोहे में बताते हैं कि कैसे अनंत चीजें एक ही स्रोत से प्रकट होती हैं, जैसे एक ही दिल में कितने ही अहसास बसे हों। वे समझाते हैं कि सब कुछ एक ही वास्तविकता का हिस्सा है, और जो हमें अलग-अलग दिखता है, वह सिर्फ हमारे मन का भ्रम है। इस एकता को समझ लेना ही सच्ची राह को पा लेना है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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