“What business brought you here, you who lie beneath the sheets? Oh caravan, compose yourself, recognize yourselves.”
तू किस काम से आया है, जबकि तू चादर ओढ़कर सोया हुआ है। ऐ काफिले, अपनी सूरत को संभालो और खुद को पहचानो।
यह दोहा हमें गहरी नींद से जगाता है, मानो कबीर हमसे पूछ रहे हों कि हम यहाँ किस उद्देश्य से आए हैं और क्यों जीवन की चादर तानकर बेखबर सो रहे हैं। 'काफिला' कहकर वे हमें, हम इंसानों को एक साथ यात्रा पर निकले यात्रियों की तरह देखते हैं। वे चाहते हैं कि हम अपनी असल पहचान को समझें, इस भौतिक संसार की मोह-माया से ऊपर उठकर अपने सच्चे स्वरूप को पहचानें और अपने जीवन के उद्देश्य को याद करें।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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