अपने-अपने साख की , सब ही लीनी भान। हरि की बात दुरन्तरा , पूरी ना कहूँ जान॥

“Of all our various claims, all are merely illusions. The word of Hari (Vishnu) is beyond me to fully speak.”

— कबीर
अर्थ

अपने-अपने साख की, सब ही मात्र भ्रम हैं। हरि की बात तो इतनी गूढ़ है कि मैं उसे पूरी तरह कह नहीं सकता।

विस्तार

अरे वाह, कबीरदास जी कितनी गहरी बात कह रहे हैं! वो समझाते हैं कि हम दुनिया में अपनी पहचान, अपनी बड़ाई और अपने दावों को जो इतना सच मानते हैं, वो सब दरअसल सिर्फ भ्रम हैं, एक तरह का दिखावा ही तो है। और देखो, भगवान हरि की जो महिमा और उनके सत्य की बात है, वो इतनी विशाल और गूढ़ है कि उसे पूरी तरह शब्दों में बयां करना या समझ पाना हमारे बस की बात नहीं। यह हमें सिखाता है कि अपने अहम् को छोड़कर ही हम उस अनमोल सत्य के करीब आ सकते हैं, जिसे पूरी तरह से कोई समझा ही नहीं सकता।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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