एक ते अनन्त अन्त एक हो जाय। एक से परचे भया , एक मोह समाय॥ 134॥
“From one to infinite, the end becomes one. From one, the illusion arises, and one is entangled in attachment.”
— कबीर
अर्थ
एक से अनंत तक, अंत में सब कुछ एक हो जाता है। एक से परचे (भ्रम) उत्पन्न होता है, और व्यक्ति मोह (अटैचमेंट) में उलझ जाता है।
विस्तार
कबीर समझाते हैं कि चाहे दुनिया एक लगे या अनंत रूपों में फैली हुई, अंततः सब कुछ एक ही मूल सत्य में विलीन हो जाता है। यह ऐसा ही है जैसे सभी नदियाँ अंत में सागर में मिल जाती हैं। पर कमाल की बात यह है कि इसी 'एक' से भ्रम और मोह का जाल भी पैदा होता है, जिसमें हम उलझकर रह जाते हैं।
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