केतन दिन ऐसे गए , अन रुचे का नेह। अवसर बोवे उपजे नहीं , जो नहीं बरसे मेह॥

“Days pass like this, with uncontained affection. Opportunities do not sprout where they are not sown, nor does rain fall where it is not called.”

— कबीर
अर्थ

कवि कहते हैं कि दिन इस प्रकार बीत गए, अनियंत्रित प्रेम के साथ। अवसर उन जगहों पर नहीं उगते जहाँ उन्हें बोया न गया हो, और न ही बारिश वहाँ होती है जहाँ उसे बुलाया न गया हो।

विस्तार

यह दोहा समय के बीत जाने और कर्म की महत्ता को बहुत खूबसूरती से समझाता है। शायर कहते हैं कि दिन यूँ ही गुजर जाते हैं और बिन जतन किया गया प्रेम भी फीका पड़ जाता है। जैसे बिना बीज बोए फसल नहीं उगती और बिना वर्षा के खेत हरे-भरे नहीं होते, वैसे ही बिना प्रयास के अवसर फलते-फूलते नहीं। हमें अपनी मेहनत से ही जीवन में कामयाबी मिलती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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