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जग मे बैरी कोई नहीं , जो मन शीतल होय। यह आपा तो डाल दे , दया करे सब कोय॥ 117॥

In the world, there is no enemy, for one whose heart is cool. Cast aside this ego, and everyone will show mercy.

कबीर
अर्थ

कवि कहते हैं कि संसार में कोई शत्रु नहीं होता, जिसके मन में शीतलता हो। यदि आप अपने अहंकार को त्याग दें, तो सभी लोग दया करेंगे।

विस्तार

कबीर दास जी यहाँ एक बहुत गहरी बात समझा रहे हैं। वे कहते हैं कि अगर हमारा मन शांत और ठंडा हो जाए, तो इस दुनिया में कोई भी हमारा दुश्मन नहीं रहता। असल में, हम जो दूसरों में बुराई देखते हैं, वह अक्सर हमारे अपने भीतर के अहंकार और अशांति का प्रतिबिंब होती है। जब हम अपने इस 'मैं' यानी अहंकार को त्याग देते हैं, तो हर कोई हम पर दया करता है और प्रेम से पेश आता है, क्योंकि तब हमारे और दूसरों के बीच कोई दीवार नहीं बचती।

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