तब लग तारा जगमगे , जब लग उगे न सूर। तब लग जीव जग कर्मवश , ज्यों लग ज्ञान न पूर॥

“Until the star shines brightly, until Sur awakens. Until the soul is driven by karma, until knowledge is not complete.”

— कबीर
अर्थ

तभी तक तारा चमकेगा, जब तक सूर जागेगा। तभी तक जीव कर्म से चलेगा, जब तक ज्ञान पूरा नहीं होगा।

विस्तार

कबीर दास जी इस दोहे में कितनी सुंदर बात कहते हैं! जैसे रात के तारे तभी तक टिमटिमाते हैं जब तक सूरज की पहली किरण नहीं फूट जाती, वैसे ही हमारी आत्मा भी कर्मों के बंधन में तब तक फँसी रहती है जब तक हमें पूरा ज्ञान नहीं मिल जाता। यह हमें याद दिलाता है कि जब तक हमें आत्मज्ञान नहीं होता, तब तक हम कर्मों के फेर में ही भटकते रहते हैं। सच्ची मुक्ति और असली उजाला तो ज्ञान की उस पूर्णता से ही मिलता है, जो सारे भ्रम मिटा देती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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