ये किताब-ए-दिल की हैं आयतें मैं बताऊँ क्या जो हैं निस्बतें — जिगर मुरादाबादी
“These are sacred verses from the book of the heart; how can I convey the ties that bind my eternal prostrations to the footprints of your graceful stride?”
अर्थ
मैं कैसे बताऊँ कि मेरे निरंतर सजदों का तुम्हारे चलने से बने कदमों के निशानों से क्या गहरा संबंध है; यह बातें मेरे दिल की किताब की पवित्र आयतों जैसी हैं।
विस्तार
शायर यहाँ इश्क़ को इबादत के मक़ाम पर रखते हुए अपने जज़्बातों को दिल की किताब की मुक़द्दस आयतें बताता है। वह कहता है कि महबूब के नाज़ुक क़दमों के निशानों और अपनी मुसलसल बंदगी यानी सजदों के गहरे रिश्ते को लफ़्ज़ों में समेटना मुमकिन नहीं। जहाँ-जहाँ महबूब की ख़ूबसूरत चाल के निशाँ पड़ते हैं, आशिक़ का सर वहीं हमेशा के लिए झुक जाता है, गोया उसका हर क़दम एक दरगाह बन गया हो।
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