“I confess I am guilty of passion's madness, yet from that side too comes the demand of a beckoning glance.”
मैं यह स्वीकार करता हूँ कि मैं इश्क़ के जुनून में गुनहगार हूँ, लेकिन कुछ इशारा या देखने की तलब उस तरफ़ (महबूब) से भी होती है।
इस शेर में आशिक़ अपनी दीवानगी और इश्क़ के जुनून का गुनाह तो बड़े प्यार से क़बूल कर लेता है, लेकिन साथ ही एक हसीं शिकवा भी करता है। उसका कहना है कि अगर वह हदें पार कर रहा है, तो इसमें सारा क़सूर सिर्फ़ उसका नहीं है—सामने वाले की निगाहें भी तो उसे अपनी तरफ़ खींचती हैं और तवज्जो माँगती हैं। यह एक बेहद नटखट और दिलकश अंदाज़ में यह याद दिलाना है कि मोहब्बत की इस आग को हवा दोनों तरफ़ से मिली है।
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