दर्द से मामूर होती जा रही है काएनात इक दिल-ए-इंसाँ मगर दर्द-आश्ना होता नहीं

“The universe is brimming, full of suffering and pain; yet stranger to another's grief, the human heart remains.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

यह पूरी कायनात दर्द से भरती जा रही है, लेकिन एक इंसान का दिल है जो दर्द से परिचित या संवेदनशील नहीं होता।

विस्तार

इस शेर में शायर एक गहरा दर्द बयां कर रहे हैं कि पूरी कायनात दुख और तकलीफों से लबरेज होती जा रही है। अफ़सोस की बात यह है कि जिस इंसान के सीने में हमदर्दी और करुणा होनी चाहिए थी, उसका दिल दूसरों के दर्द से बिल्कुल बेगाना और बेअसर बना हुआ है। यह इंसानी बेरुखी और पत्थरदिली पर एक बेहद मार्मिक चोट है, जो हमें अपने गिरेबान में झांकने पर मजबूर करती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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