इश्क़-ए-ला-महदूद जब तक रहनुमा होता नहीं ज़िंदगी से ज़िंदगी का हक़ अदा होता नहीं

“Until boundless love becomes the guiding light, life can never pay the debt it owes to life.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

जब तक असीम प्रेम मार्गदर्शक नहीं बनता, तब तक जीवन के प्रति जीवन का वास्तविक कर्तव्य पूरा नहीं हो सकता।

विस्तार

शायर बड़े अपनेपन से समझाते हैं कि सिर्फ साँसें लेना ही ज़िंदगी नहीं कहलाता। जब तक हमारे सफ़र में 'इश्क़-ए-ला-महदूद' यानी बेइंतहा और निस्वार्थ मोहब्बत हमारी रहनुमा न बने, तब तक हम ज़िंदगी का असली कर्ज़ अदा नहीं कर सकते। ज़िंदगी का असल मक़सद ही यह है कि दिल को खुला रखकर हर शै से मोहब्बत की जाए, तभी जीने का हक़ सही मायनों में पूरा होता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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