“With pain in heart I lament, while hand on heart they stand amazed; O tyrant Love, does this entire age belong solely to your sway?”
मैं दिल में दर्द लिए तड़प रहा हूँ और वे दिल पर हाथ रखे हैरान हैं; ऐ ज़ालिम इश्क़, क्या हर तरफ़ केवल तेरा ही दौर और ज़माना है?
इस शेर में एक बेहद पुरअसर मंज़र खींचा गया है—एक तरफ आशिक़ है जो दिल के दर्द से तड़पकर आहें भर रहा है, और दूसरी तरफ महबूब है जो हैरत के मारे सीने पर हाथ रखे खड़ा है। शायर यहाँ इश्क़ को एक बेपरवाह और ज़ालिम हाकिम की तरह देखता है, जिसके असर से कोई भी अछूता नहीं बचता—चाहे वह दर्द सहने वाला हो या उसे देखने वाला। यह मोहब्बत की बेपनाह ताकत के सामने एक हैरान कर देने वाला शिकवा है कि क्या यह पूरा दौर सिर्फ़ और सिर्फ़ इश्क़ की ही हुकूमत के हवाले है?
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