“No thought of the destination have I, nor sense of the path ahead; I simply wander wherever my wandering heart is led.”
मुझे न तो मंज़िल की कोई फ़िक्र है और न ही उस तक पहुँचने वाले रास्ते का कोई होश है; मेरा दिल मुझे जिस तरफ़ ले जा रहा है, मैं बस उसी ओर जा रहा हूँ।
यह शेर दिल के हवाले ख़ुद को पूरी तरह सौंप देने की बेफ़िक्री और सुकून को बयां करता है। आम तौर पर हम ज़िंदगी भर मंज़िल पाने और सही रास्ते की फ़िक्र में उलझे रहते हैं, मगर शायर ने दिमाग़ के सारे हिसाब-किताब छोड़ दिए हैं। अब उसे किसी मुक़ाम की परवाह नहीं, वह बस अपने दिल की धड़कनों और जज़्बात के पीछे-पीछे बिना किसी डर के चल पड़ा है।
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