हाँ ये सरशारियाँ जवानी की आँख झपकी ही थी कि रात गई

“Ah, the intoxicating raptures of youth! Barely had an eye blinked, and the night was gone.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

जवानी का नशा और खुमारी ऐसी थी कि अभी आँख झपकी ही थी कि पूरी रात बीत गई।

विस्तार

यह शेर जवानी के नशे और उसके बहुत तेज़ी से बीत जाने के दर्द को बड़ी सादगी से बयां करता है। शायर ने जवानी की मदहोशी और उमंगों की तुलना एक ऐसी छोटी सी रात से की है, जो पलक झपकते ही खत्म हो गई। इसमें एक मीठी सी उदासी है कि जब तक हम ज़िंदगी के इस सबसे हसीन और सुनहरे दौर को पूरी तरह जी पाते हैं, वह वक्त रेत की तरह उंगलियों से फिसल चुका होता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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