अल्लाह अगर तौफ़ीक़ न दे इंसान के बस का काम नहीं फ़ैज़ान-ए-मोहब्बत आम सही इरफ़ान-ए-मोहब्बत आम नहीं

“Unless by God's own grace bestowed, it lies beyond mere mortal art; Love's bounty may be free to all, but rare is love's enlightened heart.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

अगर ईश्वर कृपा और सामर्थ्य न दे तो यह इंसान के बस की बात नहीं है। प्रेम का प्रभाव भले ही आम हो, लेकिन प्रेम की सच्ची समझ और पहचान हर किसी के हिस्से में नहीं आती।

विस्तार

यह शेर प्यार महसूस करने और प्यार के असल मर्म को समझने के बीच का खूबसूरत फ़र्क बयान करता है। मोहब्बत की रहमत और उसका असर तो हवा या बारिश की तरह सबके लिए आम है, लेकिन उसकी रूहानी गहराई यानी 'इरफ़ान' को जान पाना हर किसी के वश में नहीं। शायर कहते हैं कि जब तक ऊपरवाले की ख़ास इनायत और तौफ़ीक़ न मिले, इंसान प्यार के इस सबसे पावन और रहस्यमयी मुक़ाम तक नहीं पहुँच सकता।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.