तेरी इनायतें कि नहीं नज़्र-ए-जाँ क़ुबूल तेरी नवाज़िशें कि ज़माना ख़राब है

“Such are your graces that the offering of my life is declined; such are your kindnesses, pleading that the times are unkind.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

यह आपकी कैसी कृपा है कि आपको मेरी जान की भेंट भी स्वीकार नहीं, और यह कैसी मेहरबानी है कि यह कहकर मना करते हैं कि ज़माना ख़राब है।

विस्तार

इस शेर में एक बहुत ही मीठा लेकिन गहरा तंज़ छुपा है। महबूब आशिक़ की जान की क़ुरबानी को भी बड़ी नज़ाकत से यह कहकर ठुकरा देता है कि वह उसकी हिफ़ाज़त कर रहा है क्योंकि ज़माना ख़राब है। यह दरअस्ल बेरुख़ी और इंकार का एक ऐसा सलीक़ा है, जिसे हमदर्दी और इनायत का ख़ूबसूरत पर्दा पहना दिया गया है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.