चेहरे तक आस्तीन वो ला कर चले गए क्या राज़ था कि जिस को छुपा कर चले गए

“Drawing a sleeve across their face, they turned and walked away; what was the secret kept concealed, that made them walk away?”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

वे अपनी आस्तीन से चेहरा ढककर चले गए; न जाने ऐसा कौन-सा राज़ था जिसे वे इस तरह छुपाकर चले गए।

विस्तार

यह शेर एक बेहद भावुक और नाज़ुक मंज़र पेश करता है, जहाँ महबूब अपने चेहरे को आस्तीन से ढँक कर ख़ामोशी से रुख़सत हो जाता है। शायरी में आस्तीन से मुँह छुपाना अक्सर छलकते आँसुओं, शर्म या किसी ऐसे गहरे दर्द का इशारा है जिसे लफ़्ज़ों में नहीं ढाला जा सकता। आशिक़ इसी उलझन और बेचैनी में पीछे छूट जाता है कि आख़िर वो कौन सा अनकहा राज़ था, जिसे वो बस आँसुओं में समेट कर चले गए।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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