“On the well's bank, who, oh who, does call? The peacocks call.”
कुएँ की पाल पर कौन-कौन बोलता है? मोर बोलते हैं।
यह दोहा ग्रामीण शांति का एक सुंदर चित्र प्रस्तुत करता है। यह एक प्रश्न से शुरू होता है, 'कुएँ की मुंडेर पर कौन-कौन बोलता है?' इसका कोमल उत्तर आता है: 'मोर बोलते हैं।' कल्पना कीजिए एक शांत ग्रामीण दृश्य, शायद किसी पारंपरिक कुएँ के पास, जहाँ आपको केवल मोरों की सुंदर आवाज़ें सुनाई देती हैं। यह शांति और प्राकृतिक सौंदर्य की भावना जगाता है, जो प्रकृति में पाए जाने वाले सरल, मनमोहक क्षणों को उजागर करता है। कुआँ, जीवन का स्रोत, इन राजसी पक्षियों के लिए एक मिलन स्थल बन जाता है, जो शांत हवा को अपनी विशिष्ट आवाज़ों से भर देता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
