મૃત્યુને ગણ્યું તેં ગોદ માતા તણી; કે શું પ્રિયમિલનની રાત સોહામણી?

“Did you deem death a mother's loving bosom;Or a beloved's sweet night, a fresh-sprung blossom?”

— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

क्या तुमने मृत्यु को माँ की गोद जैसा सुखद माना, या किसी प्रियजन से मिलन की सुहानी रात जैसा?

विस्तार

यह सुंदर दोहा पूछता है कि आपने मृत्यु को कैसे देखा। क्या आपने इसे अपनी माँ की ममतामयी गोद जैसी शांति और आराम से अपनाया? या क्या आपने इसका स्वागत ऐसे किया जैसे किसी प्रियजन से मिलन की एक खूबसूरत रात हो, जिसका लंबे समय से इंतजार था? यह एक गहरा और शायद निर्भय दृष्टिकोण सुझाता है, जहाँ अंत को डरा नहीं जाता, बल्कि इसे या तो परम आराम में एक कोमल वापसी या एक आनंदमय मिलन के रूप में देखा जाता है। यह जीवन की अंतिम यात्रा के प्रति शांत और स्वीकार्य दृष्टिकोण पर विचार करने का एक काव्यात्मक तरीका है, जो आमतौर पर गंभीर विषय को शांत और वांछनीय बनाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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