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વૈશાખી દાવાનલ! આવો. દિલદાર! ક્રોડો કંગાલ હજુ કેમ કરી જીવે!

O Vaishakhi wildfire! Come forth. O Beloved!How do millions of wretched still survive!

ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

हे वैशाखी दावानल! आओ। हे दिलदार! करोड़ों कंगाल अभी भी कैसे जीवित हैं!

विस्तार

यह दोहा गरीबी और कठिनाई का मार्मिक चित्रण करता है। इसमें 'वैशाखी दावानल' को पुकारा गया है, जो शायद जीवन की तीव्र कठिनाइयों या दमनकारी परिस्थितियों का प्रतीक है। फिर 'दिलदार' को संबोधित किया गया है, संभवतः व्यंग्यात्मक रूप से, या किसी ऐसे व्यक्ति से हताश अपील के रूप में जिसे मदद करनी चाहिए। कवि पूछता है, 'करोड़ों गरीब अभी भी कैसे जीते हैं?' यह असंख्य लोगों द्वारा सामना किए जाने वाले विशाल संघर्षों और गरीबी को उजागर करता है, इतनी भारी चुनौतियों के बीच उनके अस्तित्व पर सवाल उठाता है। यह सामाजिक असमानता और वंचितों के दृढ़ संकल्प या उनकी निराशा पर एक गहरी टिप्पणी है।

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