“Burn every leaf of the tree, O Beloved! Only deserts, spread deserts, O Beloved!”
हे प्रिय! पेड़ के हर पत्ते को जला दो। बस रेगिस्तान, रेगिस्तान फैला दो, हे प्रिय!
यह शेर प्रेम में गहन निराशा या पूर्ण समर्पण की भावना व्यक्त करता है। शायर अपने महबूब से कहता है कि हर पेड़ के पत्ते-पत्ते को जला दो, और हर जगह बस रेगिस्तान फैला दो। यह एक शक्तिशाली चित्रण है जिसका अर्थ है कि महबूब के बिना, सारी सुंदरता और जीवन, पेड़ों और पत्तों से दर्शाया गया है, व्यर्थ है और उसे बंजरपन में बदल दिया जाना चाहिए। दुनिया एक उजाड़ परिदृश्य बन जाती है, जो महबूब से जुदाई में प्रेमी की आंतरिक तड़प या खालीपन को दर्शाता है। यह इस बात पर जोर देता है कि केवल महबूब ही मायने रखता है, और बाकी सब कुछ नष्ट किया जा सकता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
