થીગડયાગડ કરીને દેહ-લાજ રાખે! ક્યાંથી આ ફાજલ ટુકડાઓ, દિલદાર!

“With patches upon patches, it maintains the body's modesty! From where do these superfluous pieces come, O beloved!”

— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

बार-बार पैबंद लगाकर शरीर की लाज रखी जाती है। हे प्रिय, ये अतिरिक्त टुकड़े कहाँ से आते हैं?

विस्तार

यह दोहा बताता है कि हम कैसे अपनी लाज या सम्मान बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास करते हैं, अक्सर चीजों को जोड़-तोड़कर। यह एक पुराने कपड़े को बार-बार सिलाई करके पहनने जैसा है। फिर कवि पूछता है, "ये सारे अतिरिक्त, अनावश्यक टुकड़े कहाँ से आ जाते हैं, मेरे प्यारे?" यह जीवन की चुनौतियों के बारे में एक मार्मिक सवाल है, कि हम कैसे खुद को संभालने की कोशिश करते रहते हैं, फिर भी नई परेशानियाँ या अप्रत्याशित बाधाएँ आती रहती हैं, जिससे यह काम कभी खत्म नहीं होता। यह जीवन की मांगों से निपटने के निरंतर संघर्ष के प्रति थकान या हैरानी को व्यक्त करता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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