“She set Lord Rama's image aside from her heart's core,Oh lady! She shook the very vine of her renown.”
उसने राम को अपने हृदय के मूल से दूर कर दिया। हे सखी! उसने अपनी कीर्ति की बेलों को झकझोर दिया और नष्ट कर दिया।
यह दोहा उस व्यक्ति के बारे में है जिसने अपने हृदय से भगवान राम को, यानी भक्ति या धर्म को दूर कर दिया। कवि कहते हैं कि ऐसा करके उस व्यक्ति ने अपनी ही कीर्ति और यश की बेलों को झकझोर दिया या नष्ट कर दिया। यह हमें याद दिलाता है कि जब हम सही मार्ग या अपनी आध्यात्मिक नींव से भटक जाते हैं, तो हमारी अच्छी प्रतिष्ठा और मान-सम्मान भी नष्ट हो सकते हैं। यह कर्म के परिणामों पर एक गहरा विचार है, जिसमें बताया गया है कि आंतरिक पवित्रता खोने से बाहरी पहचान भी धूमिल हो जाती है।
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