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ઓલી કોણ ફંગોળ લગાવત એકલ ફૂલ બકુલની ડાળ પરે! મોર બની થનગાટ કરે

Who gently sways the lonely Bakul bloom on its branch?The peacock, full of life, begins its joyous dance.

ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

डाल पर अकेले बकुल के फूल को कौन धीरे-धीरे हिला रहा है? मोर बनकर खुशी से नाच रहा है।

विस्तार

यह दोहा खुशी और आश्चर्य के एक क्षण को बड़ी खूबसूरती से दर्शाता है। यह एक प्रश्न से शुरू होता है, 'वह कौन है जो बकुल के पेड़ की एक अकेली फूल की डाली पर चंचल रूप से झूल रहा है?' यह छवि नाजुक सुंदरता और जिज्ञासा की भावना पैदा करती है। फिर दूसरी पंक्ति भावना से भर उठती है: 'मेरा मन एक मोर की तरह उमंग से थिरक उठता है।' यह सुंदर ढंग से बताता है कि कैसे एक साधारण, मनमोहक दृश्य भीतर एक गहरी खुशी और जीवंत ऊर्जा जगा सकता है, जिससे आत्मा एक नाचते हुए मोर जितनी ही जीवंत और अभिव्यंजक महसूस होती है।

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