નયણાંના ધોધ ખારા ધૂધવા ઢળે; સૂકાં સૂકાં તે મારાં હાડચામ ચૂવે ને

“The bitter floods of tears from my eyes fall, gushing; And they drain my dry, dry bones and skin.”

— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

मेरे आँखों से कड़वी आँसुओं की धाराएँ उमड़ते हुए गिरती हैं; और वे मेरी सूखी, सूखी हड्डियों और चमड़ी को निचोड़ देती हैं।

विस्तार

यह दोहा गहरे दुख का एक जीवंत चित्रण करता है। कल्पना कीजिए कि आँसू सिर्फ गिर नहीं रहे हैं, बल्कि आँखों से खारे और गरजते झरने की तरह बह रहे हैं। कवि बताते हैं कि ये कड़वे आँसू इतने प्रबल हैं कि ऐसा लगता है मानो वे उनकी सूखी हड्डियों और चमड़ी में अंदर तक समा रहे हों। यह इतनी गहरी और आत्मसात करने वाली पीड़ा को व्यक्त करने का एक शक्तिशाली तरीका है, जो महसूस होता है कि यह आपको भीतर से पिघला रही है, आपके अस्तित्व के मूल को छू रही है, जिससे तीव्र दर्द से कुछ भी अछूता नहीं रहता।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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