‘મારાં બાળ પરોઢિયે જાગીને માગશે ભાત’ વિચારી એ દેહ દમે- ત્યારે હાય રે હાય, કવિ! તને સંધ્યા ને તારકનાં શેણે ગીત ગમે!

“"My children will wake at dawn and ask for food," he thinks, and strains his body's might-Then, alas, O poet! Why do songs of dusk and stars bring you delight?”

— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

यह सोचकर कि "मेरे बच्चे सुबह उठकर खाना मांगेंगे", वह अपने शरीर को थका देता है। ऐसे में हे कवि, तुम्हें संध्या और तारों के गीत क्यों अच्छे लगते हैं?

विस्तार

यह खूबसूरत दोहा एक माँ के निस्वार्थ प्रेम का मार्मिक चित्रण करता है। कल्पना कीजिए एक माँ की, जो सिर्फ इस एक विचार के साथ अथक परिश्रम कर रही है, शायद खुद भी भूखी रहकर: 'मेरे बच्चे सुबह उठकर खाना मांगेंगे।' वह अपने शरीर को हद तक धकेलती है, सब कुछ त्याग देती है ताकि उसके बच्चे भूखे न रहें। जीवन के इस कठोर, दैनिक संघर्ष के बीच, कवि एक गहरा सवाल पूछते हैं: 'हे कवि, तुम कैसे सुंदर संध्या और चमकते तारों के गीत गाने में आनंद पा सकते हो?' यह मानवता के लिए एक सशक्त पुकार है, जो हमें सतही सुंदरता से परे देखने और अपने आसपास के लोगों द्वारा सामना की जा रही वास्तविक कठिनाइयों को समझने और स्वीकार करने की याद दिलाती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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