પરદેશીડા વિધવિધ વેશે -નામ નહિ જાણું કે ગામ-

“O strangers in various guises,I know not your name or your town.”

— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

हे परदेसियों विभिन्न वेशों में, मैं तुम्हारा नाम या तुम्हारा गाँव नहीं जानता।

विस्तार

यह दोहा एक अजनबी से मिलने के अनुभव को खूबसूरती से दर्शाता है। यह एक 'परदेसी' या 'यात्री' की बात करता है जो तरह-तरह के रूपों या वेशभूषा में सामने आता है, शायद हमेशा अपनी पहचान बदलता रहता है या जिसकी असली पहचान अज्ञात है। वक्ता स्वीकार करता है, 'मैं तुम्हारा नाम नहीं जानता, और न ही तुम्हारा गाँव।' यह रहस्य और गुमनामी की भावना पैदा करता है, यह उजागर करता है कि हम कभी-कभी उन लोगों के बारे में कितना कम जानते हैं जो हमारे रास्ते में आते हैं, खासकर वे जो लगातार घूमते रहते हैं या खुद के अलग-अलग पहलू प्रस्तुत करते हैं। यह मुलाकातों की क्षणभंगुर प्रकृति और हर उस चेहरे के पीछे की अनकही कहानियों पर एक मार्मिक विचार है जिसे हम देखते हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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