સાગર પીનારા! અંજિલ નવ ઢોળજો, બાપુ! અણખૂટ વિશ્વાસે વહ્યું જીવન તમારું:

“O ocean-drinkers! Spill not the offering from your cupped hands, dear sir!Your life has flowed, borne by inexhaustible trust.”

— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

हे सागर पीने वालों, अपनी अंजुलि में पकड़ी हुई भेंट को मत गिराना. तुम्हारा जीवन अटूट विश्वास के सहारे बहता रहा है.

विस्तार

यह दोहा हमें सिखाता है कि भले ही हमने जीवन में बहुत बड़ी उपलब्धियां हासिल की हों, फिर भी हमें छोटी से छोटी चीज़ का भी सम्मान करना चाहिए। यह उस व्यक्ति को संबोधित करता है जिसने 'सागर पी लिया है', यानी जिसने विशाल चुनौतियों पर विजय प्राप्त की है, और उसे चेतावनी देता है कि अपनी 'अंजलि' यानी वर्तमान क्षणों, शांति या छोटी खुशियों को लापरवाही से न गंवाए। दूसरी पंक्ति खूबसूरती से बताती है कि उनका पूरा जीवन 'अटूट विश्वास' पर आधारित रहा है। अतः संदेश यह है: अपने पास जो कुछ भी है, चाहे वह बड़ा हो या छोटा, उसे संजोएं और उस अडिग विश्वास को याद रखें जिसने आपके मार्ग को निर्देशित किया है।

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