સતને ત્રાજવડે મારાં કલેજાં ચડાવિયાં મેં, શીશ તો નમાવ્યું શાસનદંડે હો....જી.

“Upon truth's scales, my very heart I laid, My head, indeed, to righteous rule's rod obeyed.”

— ज़वेરचंद मेघानी
अर्थ

मैंने अपने हृदय को सत्य के तराजू पर रखा है, और निश्चय ही, मैंने अपना शीश न्यायपूर्ण शासन के दंड के आगे झुका दिया है।

विस्तार

यह दोहा व्यक्तिगत सत्य और सत्ता की माँगों के बीच के संघर्ष को खूबसूरती से दर्शाता है। कवि कहते हैं कि उन्होंने अपने 'हृदय' को सत्य की तराजू पर रखा है, जिसका अर्थ है कि उनकी गहरी आस्थाएँ और आंतरिक स्वयं सही और सच्चे के प्रति समर्पित हैं। यह प्रामाणिक रूप से जीने की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। फिर भी, अगली पंक्ति एक व्यावहारिक वास्तविकता को प्रकट करती है: उन्होंने 'शासनदंड' के सामने अपना सिर झुकाया है। यह इंगित करता है कि जहाँ उनकी आंतरिक आत्मा सत्य का पालन करती है, वहीं वे बाहरी नियमों या शक्ति को स्वीकार करते हैं और उनके सामने झुकते हैं, शायद आवश्यकता या व्यवस्था के सम्मान के कारण। यह ऐसी दुनिया में रहने पर एक मार्मिक चिंतन है जहाँ आंतरिक अखंडता कभी-कभी बाहरी अनुपालन से मिलती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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