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सवाद-ए-रौमत-उल-कुबरा में दिल्ली याद आती है
वही इबरत वही अज़्मत वही शान-ए-दिल-आवेज़ी

In the fragrant scent of Rumt-ul-Kubra, Delhi is remembered, That same glory, that same grandeur, that same pride of the heart.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

सवाद-ए-रौमत-उल-कुबरा की सुगंध में दिल्ली याद आती है; वही गौरव, वही महानता, वही दिल का अभिमान याद आता है।

विस्तार

दोस्तों, यह शेर दिल्ली को समर्पित एक बहुत ही भावनात्मक श्रद्धांजलि है। शायर, अल्लामा इकबाल, सिर्फ़ एक शहर को याद नहीं कर रहे हैं; वह उसकी आत्मा को याद कर रहे हैं। कहते हैं कि 'रौमत-उल-कुबरा' (महान वैभव) में भी, केवल दिल्ली की याद आती है—उसकी ऐतिहासिक शान, उसकी अज़मत, और वो ख़ास नज़ाकत जो दिल में बसती है। यह पहचान और जुड़ाव का एक ज़बरदस्त इज़हार है।

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