न पूछ 'इक़बाल' का ठिकाना अभी वही कैफ़ियत है उस की
कहीं सर-ए-रहगुज़ार बैठा सितम-कश-ए-इंतिज़ार होगा
“Do not ask about Iqbal's dwelling place; it is still the same condition, Somewhere on the path of life, there will be a tyrant of waiting.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
इक्बाल का ठिकाना पूछना नहीं; उसकी हालत अभी वैसी ही है कि कहीं जीवन के मार्ग पर एक इंतज़ार का क्रूर शासक बैठा होगा।
विस्तार
यह शेर ज़िंदगी के सफ़र की अनिश्चितता को बयां करता है। शायर कहते हैं कि मेरा ठिकाना मत पूछना, क्योंकि मेरा हाल-ए-दिल तो वही है। ये 'सितम-कश' कोई इंसान नहीं है, बल्कि वो चुनौती है, वो इम्तिहान है जो ज़िंदगी के हर मोड़ पर हमारा इंतज़ार कर रहा है। यह शेर हमें याद दिलाता है कि ज़िंदगी कभी शांत नहीं होती, हमें हमेशा तैयार रहना पड़ता है!
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