गो फ़क़्र भी रखता है अंदाज़-ए-मुलूकाना
ना-पुख़्ता है परवेज़ी बे-सल्तनत-ए-परवेज़
“Even a beggar possesses the style of royalty; a lover is unstable without the state of love.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
गो फ़क़्र भी रखता है अंदाज़-ए-मुलूकाना का अर्थ है कि एक भिखारी में भी राजा जैसा अंदाज़ होता है। और ना-पुख़्ता है परवेज़ी बे-सल्तनत-ए-परवेज़ का अर्थ है कि प्रेम में कोई भी व्यक्ति बिना प्रेम की स्थिति के अस्थिर होता है।
विस्तार
यह शेर दो गहरे फ़लसफ़ों को समेटे हुए है। शायर कहते हैं कि हर चीज़ में एक नजाकत होती है; एक आवारा कुत्ते में भी मुल्क के राजा जैसा अंदाज़ होता है। और दूसरी पंक्ति हमें आगाह करती है कि बिना किसी नियंत्रण या व्यवस्था के जुनून, एक ऐसे राज्य जैसा है जिसका कोई राजा न हो—वो ख़ूबसूरत तो है, पर बिखर जाएगा।
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