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ये कौन ग़ज़ल-ख़्वाँ है पुर-सोज़ ओ नशात-अंगेज़
अंदेशा-ए-दाना को करता है जुनूँ-आमेज़

Who is this ghazal lover, so burning and intoxicating, Who turns the mere sight of a beloved into madness?

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

ये कौन ग़ज़ल-ख़्वाँ है जो बहुत उत्तेजक और मदहोश करने वाला है, जो महबूब की झलक को भी पागलपन बना देता है।

विस्तार

ये शेर उस गहरे जुनून और इश्क़ की बात करता है जो शायरी में होता है। शायर पूछते हैं कि यह कौन है, जो इतना महकदार और नशा देने वाला ग़ज़ल-ख़्वाँ है। उनका जुनून इतना गहरा है कि महबूब का सिर्फ ज़िक्र करना भी, उसकी आहट का अंदेशा करना भी, इंसान को पागलपन की हद तक पहुंचा देता है। यह इश्क़ और कला का एक अद्भुत मेल है।

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