खोया गया जो मतलब हफ़्ताद ओ दो मिल्लत में
समझेगा न तू जब तक बे-रंग न हो इदराक
“The meaning lost in the seventy-two nations, Will you understand it until your perception is colorless?”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
जो मतलब खोया गया है सैंताड़-दो मिलतों में, वह तुम तब समझोगे जब तक तुम्हारा बोध रंगीन न हो जाए।
विस्तार
यह शेर गहरे आत्म-ज्ञान की बात करता है। अल्लामा इकबाल कहते हैं कि जो मतलब सात और दो मिलतों में खो गया है, वह सामान्य समझ से नहीं पकड़ा जा सकता। जब तक आपका 'इद्राक' (समझ) पूरी तरह से प्रकाशित नहीं हो जाएगा, तब तक आप उस गहराई को कभी नहीं जान पाएंगे। यह पंक्तियाँ हमें ज्ञान की ओर बढ़ने का संदेश देती हैं।
