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चुप रह न सका हज़रत-ए-यज़्दाँ में भी 'इक़बाल'
करता कोई इस बंदा-ए-गुस्ताख़ का मुँह बंद

I could not remain silent, even in the presence of the Lord (Yazdān), 'Iqbal' asks, Who will shut the mouth of this impudent person?

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

मैं चुप नहीं रह सका, यहाँ तक कि हज़रत-ए-यज़्दाँ की उपस्थिति में भी, 'इक़बाल' पूछता है, कौन इस गुस्ताख़ व्यक्ति का मुँह बंद करेगा।

विस्तार

यह शेर उस जज़्बे की बात करता है जो किसी के काबू में नहीं है। शायर कहते हैं कि 'हज़रत-ए-यज़्दाँ' (यानी खुदा की मौजूदगी) भी इस ज़िद्दी इंसान का मुँह बंद नहीं कर पाई। इसका मतलब है कि कुछ बातें, कुछ सच, इतने गहरे होते हैं कि उन्हें चुप कराना नामुमकिन होता है। यह एक बेबाक और न रुकने वाले जज़्बे का ऐलान है!

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