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पुर-सोज़ नज़र-बाज़ ओ निको-बीन ओ कम आज़ार
आज़ाद ओ गिरफ़्तार ओ तही कीसा ओ ख़ुरसंद

Oh, gaze that burns, oh, the one who is blind, and whose torment is little; oh, free and captive, oh, what kind of tale, oh, beloved.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

ऐ, पुर-सोज़ नज़र-बाज़ और निको-बीन और कम आज़ार; ऐ, आज़ाद और गिरफ़्तार, और तही कैसा और ख़ुरसंद।

विस्तार

यह शेर इंसान के दिल की उलझनों और जीवन की विरोधाभासी सच्चाई को दिखाता है। शायर कहते हैं कि ज़िंदगी में सब कुछ विपरीत है—कभी आज़ादी है तो कभी क़ैद। यह नज़रों का जलना है, यह आँखों का अँधेरा है, और यह दिल का वो सुकून है जो हर हाल में चाहिए। यह एक गहरा दार्शनिक बयान है!

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