इलाज आतिश-ए-'रूमी' के सोज़ में है तिरा
तिरी ख़िरद पे है ग़ालिब फ़िरंगियों का फ़ुसूँ
“Your cure lies in the burning passion of 'Rumi', And on your worth, Ghalib, the foreign magicians' spell.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
इलाज आतिश-ए-'रूमी' के सोज़ में है तिरा, तेरी ख़िरद पे है ग़ालिब फ़िरंगियों का फ़ुसूँ। (अर्थात, तुम्हारा इलाज 'रूमी' की आग में जलने की पीड़ा में है, और तुम्हारी कीमत पर 'ग़ालिब' का विदेशी जादू है।)
विस्तार
यह शेर एक बहुत गहरे और दर्दनाक विषय पर बात करता है—पहचान का संकट। शायर कहते हैं कि हमारे ज़ख्मों का इलाज तो कहीं बाहर, किसी और की ज़मीन पर ही मिलेगा। और सबसे कड़वी बात ये है कि हमारी अपनी समझदारी, हमारी ख़िरद पर भी अब बाहरी असर पड़ चुका है। यह सिर्फ़ एक शेर नहीं है.... बल्कि एक आईना है, जो हमें अपनी जड़ों और अपनी सोच पर सवाल उठाने को मजबूर करता है।
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