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उठा मैं मदरसा ओ ख़ानक़ाह से ग़मनाक
न ज़िंदगी न मोहब्बत न मा'रिफ़त न निगाह

I have left the school and the khanqah, filled with sorrow; no life, no love, no gnosis, nor the glance.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

मैंने मदरसा और खानक़ाह को ग़मगीन होकर छोड़ दिया है; न जीवन है, न मोहब्बत है, न मा'रिफ़त है, न निगाह।

विस्तार

यह शेर गहरे निराशा और आध्यात्मिक खालीपन को दर्शाता है। अल्लामा इकबाल कहते हैं कि वह मदरसा (शिक्षा का केंद्र) और ख़ानक़ाह (सूफी समाधि) दोनों को ग़मगीन मन से छोड़कर जा रहे हैं। उन्हें जीवन में कोई उद्देश्य नहीं मिला.... न मोहब्बत का एहसास है, न मा'रिफ़त (गहन ज्ञान) है, और न ही किसी चीज़ को देखने की नज़र। यह आत्मा की वो पुकार है जो बताती है कि शांति कहीं और है।

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